अगर भारत ने अब चार गलतियां दोहराई, तो वर्ल्ड कप से तय है विदाई।अब कोच गौतम गंभीर या कप्तान सूर्य कुमार को कुछ कहना होगा क्योंकि दो मुकाबले रह गए हैं सुपर एट के जिंबाब्वे और वेस्ट इंडीज से। लेकिन अगर इन मुकाबलों में गलतियां दोहराते रहे तो फिर बाहर जाना तय है। यानी कि आप सेमीफाइनल में तो नहीं जाएंगे। वो कौन-कौन सी गलतियां हैं? क्या कुछ करना होगा टीम इंडिया को सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए? यह सारी चीजें आपको मैं अपनी इस रिपोर्ट में बताऊंगा। मैच तो जीतने हैं। रन रेट भी बेहतर करना है। क्योंकि अगर रन रेट गड़बड़ हुआ तो फिर मामला बिगड़ जाएगा |
और अगर हार मिली तो नमस्ते तय हो जाएगा। तो कौन-कौन सी गलतियां हैं? जो अभी तक हम करते तो आ रहे हैं लेकिन अब नहीं दोहरानी है क्योंकि अब दोहराएंगे तो फिर बाहर जाएंगे।

टीम इंडिया को सेमीफाइनल में पहुंचना है, तो सुधारनी होंगी ये 4 बड़ी गलतियां!
T20 वर्ल्ड कप का सफर अब उस मोड़ पर है जहाँ एक छोटी सी चूक भी हमें बाहर का रास्ता दिखा सकती है। कहने को हमारा मैच जिम्बाब्वे से है, लेकिन हमें यह नहीं सोचना कि विरोधी कौन है, हमें बस यह सोचना चाहिए कि हमें जीतना है और बड़े अंतर से जीतना है। अगर हमें सेमीफाइनल का टिकट पक्का करना है, तो इन चार मोर्चों पर तुरंत काम करना होगा:
1. प्लेइंग 11 का सही चुनाव (Selection का सिरदर्द)
हमें अपनी टीम चुनते समय बहुत प्रैक्टिकल होना पडेगा। राइट-हैंड और लेफ्ट-हैंड कॉम्बिनेशन का ख्याल रखना जरूरी है क्योंकि हमारे पास लेफ्टी बल्लेबाजों की भरमार हो गई है (तिलक, शिवम, अक्षर, रिंकू, अभिषेक)। जब विरोधी टीम के पास ऑफ-स्पिनर्स होते हैं, तो हम फंस जाते हैं और कुछ नहीं कर पाते हैं।
मेरा मानना है कि रिंकू सिंह को 8वें नंबर पर खिलाने का कोई तुक नहीं बनता। वाशिंगटन सुंदर को ऊपर भेजने से बेहतर है कि आप अक्षर पटेल पर भरोसा जताएं, जो की आपके उप-कप्तान भी हैं और गेंद से भी कमाल कर रहे हैं। हमें एक एक्स्ट्रा बॉलर की जरूरत है, क्योंकि सिलेक्शन में एक भी गलती हुई तो सेमीफाइनल का सपना टूट सकता है।
2. स्पिन के खिलाफ खराब फॉर्म और धीमी बैटिंग
हमने देखा है कि चाहे पाकिस्तान हो, नीदरलैंड्स हो या यूएसए—हमारे बल्लेबाज स्पिन के सामने संघर्ष करते हैं। पावरप्ले के 6 ओवरों में तो हम रन बना लेते हैं, 10 ओवर में 100 तक भी पहुंच जाते हैं, लेकिन आखिरी 10 ओवरों में हम वही पुराने ढर्रे पर आ जाते हैं और सिर्फ 70-80 रन ही जोड़ पाते हैं। मिडिल और डेथ ओवर्स में हमें अपनी ‘आंखें खोलनी’ होंगी और ऑफ-स्पिनर्स को बेहतर तरीके से टैकल करना होगा।
3. खराब फील्डिंग: ‘कैचेस विन मैचेस’
यह देखकर वाकई दुख होता है कि एक बड़ी टीम होने के बावजूद हम टूर्नामेंट में अब तक 9 से 10 कैच छोड़ चुके हैं। हमने इस मामले में नमीबिया जैसी छोटी टीमों को भी पीछे छोड़ दिया है। याद रखिए, टी20 में अगर आपने फील्डिंग में 10-12 रन फालतू दे दिए, तो आप मैच से बाहर हो जाते हैं। खिलाड़ियों को 100 नहीं, 500% देना होगा। बाउंड्री पर कूदिए, हाथ छिलवाइए, चोट लगवाइए लेकिन रन रोकिए। अगर विरोधी दो रन चुराने की सोच रहा है, तो उसे एक पर ही रोकिए। चुस्ती दिखानी ही होगी!
4. डेथ ओवरों में गेंदबाजी की कमजोरी
सच कहूं तो, “बुमराह हैं तो मुमकिन है”, वरना हालत बहुत बुरी है। अर्शदीप, वरुण, शिवम दुबे और यहाँ तक कि हार्दिक पांड्या भी डेथ ओवरों में उतने असरदार नहीं दिख रहे। पिछले मैच में शिवम और वरुण को काफी रन पड़े। आखिरी के 5-6 ओवरों में हमें और मजबूती से पकड़ बनानी होगी। अगर हम बड़ा स्कोर नहीं बना पाते, तो कम से कम विरोधी को छोटे स्कोर पर रोकना ही होगा।
सेमीफाइनल का सीधा समीकरण
अब इधर-उधर देखने की जरूरत नहीं है। सिंपल है—अपने दोनों मैच जीतिए और रन रेट को रॉकेट की तरह ऊपर ले जाइए। अगर आप 250 बनाते हैं, तो सामने वाली टीम को 100 पर समेटिए। अगर आप चेज कर रहे हैं, तो 5-6 ओवर में मैच खत्म करने की कोशिश कीजिए। फिर उम्मीद कीजिए कि साउथ अफ्रीका अपने तीनों मैच जीते और वेस्टइंडीज सिर्फ एक।
गलतियों से बचिए, सेमीफाइनल में जाइए और एक बार फिर से कप उठाइए!
आपको क्या लगता है? क्या टीम इंडिया इन कमियों को दूर कर पाएगी? या कोई ऐसी गलती है जो मैं भूल गया हूँ? कमेंट में अपनी राय जरूर दें!